उत्तर प्रदेशराज्य

बेटे ने लालच में उतरा पिता को मौत के घाट

स्वतंत्रदेश,लखनऊ: कोरोड़ों का मकान हथियाकर बेचने के लिए इकलौते बेटे सागर राम ने पिता ज्ञानी यादव (90) की हत्या की थी। नशे में धुत सागर राम ने वृद्ध दिव्यांग पिता की धारदार हथियार से गला रेतकर आठ अक्टूबर की देर रात हत्या कर दी थी। मकान हथियाने के लिए वह आए दिन पिता के साथ मारपीट कर उन्हें प्रताड़ित करता था।

लखनऊ में तालकटोरा स्थित झोपड़पट्टी में वृद्ध की हत्या का मामले में पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपित को किया गिरफ्तार। मकान बेचने के लिए इकलौते बेटे ने वृद्ध को उतारा था मौत के घाट। पुलिस ने किया गिरफ्तार।

बेटे की हरकतों से त्रस्त वृद्ध ने पौत्र के नाम कर दिया था मकान

सीओ बाजारखाला अनूप कुमार सिंह ने बताया कि सागर राम नशे का लती था वह आए दिन पिता के साथ मारपीट करता था। उन्हें ताने मारता था। इससे त्रस्त होकर ज्ञानी ने दोषपुर गौरीगंज अमेठी स्थित करोड़ों की कीमत के मकान को अपने पौत्र के नाम कर दिया था और खुद को संरक्षक बनाया था। जिससे अनूप उस मकान को न बेच पाए। उधर, सागर राम ने कई लोगों से रुपया ले रखा था। उस पर उधारी भी थी। जिस मकान में वह किराए पर रहता था उसका किराया भी कई माह का नहीं दिया था। वह लोगों को भरोसा देता था कि मकान बेचकर उनकी उधारी चुका देगा।

हत्या से तीन दिन पहले गया था पैत्रक आवास

सागर राम पिता की हत्या करने से तीन दिन पहले गांव गया था। वहां से कुछ दस्तावेज भी लेकर आया था। पूरा मकान आठ विसवा में था। जिसमें से करीब छह बिसवा पुराना बना हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि वह ज्ञानी को बहुत परेशान करता था। इसके पहले भी सागर राम गांव में कई खेत आदि बेच चुका था। अब ज्ञानी के पास सिर्फ मकान बचा था। वह मकान की बिक्री नहीं होने देना चाहते थे। जिसको किया नामजद उससे भी ले रखा था रुपये, जा चुका है जेल भी इंस्पेक्टर धनन्जय सिंह ने बताया कि सागर राम ने जिस सागर गुप्ता के ऊपर हत्या का आरोप लगाया पड़ताल में उस पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। सागर राम ने सागर गुप्ता से भी हजारों रुपये उधार ले रखे थे। सागर राम जानलेवा हमले के मामले में भी एक बार जेल जा चुका है। आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है

इलाज का हवाला देकर पिता को रख दिया था झोपड़पट्टी में

 

पुलिस ने बताया कि वृद्ध ज्ञानी यादव के पैर में चर्म रोग था। इस लिए वह चल फिर नहीं पाते थे। राजाजीपुरम स्थित एक अस्पताल से उनका इलाज चल रहा था। इस लिए तीन माह पहले सागर राम पिता को अस्पताल दिखाने आया था। उसके बाद उन्हें यहां झोपड़पट्टी में रख दिया था। वह यहीं उन्हें खाना दे जाया करता था। जबिक सागर राम, पत्नी और बच्चों के साथ रुकुंदीपुर में अलग किराए के मकान में रहता था।

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