उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ के थानों का हाल : कराने गए एफआइआर, मिलीं गालियां

स्वतंत्रदेश,लखनऊ ;तस्वीर में जमीन पर बैठे फरियादी को देखिए, यह महज एक पीडि़त नहीं बल्कि हमदर्दी, मित्रता और मदद को तत्पर रहने के पुलिसिया दावे घुटनों पर बैठे हैं। वर्दी की हमदर्दी, मित्र पुलिस और मदद को तत्पर पुलिस जैसे स्लोगन सुनने, पढऩे में ही अच्छे हैं, लेकिन हकीकत उलट ही है।

बुधवार को पांच थानों में परखी हकीकत। खोखला साबित हुआ लखनऊ पुलिस मदद को तत्पर का स्लोगन। थानों में एफआइआर के लिए लोगों को करनी पड़ती है जद्दोजहद।

बुधवार को राजधानी के पांच थानों में पड़ताल की तो सामने आई पुलिसकर्मियों की गंदी भाषा, फरियादियों का अपमान और पीडि़तों की सुनवाई के बजाय सुबूत मांगने का चलन। मुख्यमंत्री के बार-बार निर्देश के बावजूद थानों में पीडि़तों की सुनवाई नहीं हो रही है। कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद पुलिस की कार्यशैली में बेहतर बदलाव की उम्मीद की गई थी, लेकिन   पड़ताल में पुलिसकर्मी न केवल लापरवाह बल्कि संवेदनहीन नजर आए।

थानों में एफआइआर की जगह मिलती हैं गालियां

थाना अलीगंज – संवाददाता ऋषि मिश्र दोपहर करीब डेढ़ बजे पहुंचे। संवाददाता थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों से जेब से पर्स चोरी होने की एफआइआर दर्ज करने की बात कहते हैं। ड्यूटी पर मौजूद महिला सिपाही उनसे ऑनलाइन शिकायत की सलाह देती है और फिर पड़ोस में बैठे दारोगा राजेंद्र कुमार को प्रकरण से अवगत कराती है। दारोगा संवाददाता से पूछते हैं कि आपको कैसे पता कि आपके जेब से पर्स चोरी हुई है, कहीं गिरी नहीं है। संवाददाता ने बताया कि पर्स उनकी जेब में बहुत अच्छी तरह से रखा था, जो गिर नहीं सकता है। किसी जेबकतरे ने ही निकाला है। पर्स में कुछ रुपये, एटीएम कार्ड व ड्राइवि‍ंंग लाइसेंस था। दारोगा के मांगने पर संवाददाता उन्हें प्रार्थना पत्र देता है। प्रार्थना पत्र पढ़ते ही दारोगा एफआइआर दर्ज करने से मना कर देते हैं।

थाना हुसैनगंज : संवाददाता अंशू दीक्षित बुधवार सुबह करीब 11 बजे पर्स चोरी होने की शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, लेकिन आधे घंटे तक बैठाए रखने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। संवाददाता ने जब इंस्पेक्टर से मिलने की कोशिश की तो बाहर बैठे सिपाहियों ने भीतर जाने से मना कर दिया। रिपोर्ट लिख रहे हेड कांस्टेबल ने बताया कि अगर एटीएम और ड्राइविंग लाइसेंस पर्स में था तो मुहर लगवा लो और दूसरा बनवा लेना, लेकिन एफआइआर ऑनलाइन ही दर्ज की जाएगी। बार-बार निवेदन करने पर हेड कांस्टेबल ने कहा कि इंस्पेक्टर साहब एफआइआर दर्ज करवाने के लिए थोड़ी बैठे हैं। साइबर कैफे जाओ।

थाना आशियाना : संवाददाता धर्मेंद्र मिश्र बुधवार को दिन में करीब पौने चार बजे आशियाना थाने में बाइक चोरी की शिकायत दर्ज कराने जाते हैं। बाहर बैठा एक सिपाही उनसे पूछताछ करता है। इसके बाद कंप्यूटर कक्ष में मौजूद पुलिसकर्मियों के पास भेज देता है। कक्ष में मौजूद तीन सिपाही संवाददाता से पूछताछ करते हैं। संवाददाता उनसे कहता है कि वह साउथ सिटी का रहने वाला है, जिसपर पुलिसकर्मी उसे पीजीआइ थाने में जाकर शिकायत करने को बोलते हैं। एक पुलिसकर्मी ऑनलाइन एफआइआर दर्ज करने की सलाह देता है। वहीं एक सिपाही नसीहत देता है कि बाइक ऐसी जगह खड़ी करो, जहां से दिखाई दे। काफी जददेजहद के बाद सिपाही प्रार्थना पत्र लिखने के लिए कहते हैं।

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