उत्तर प्रदेशराज्य

नेपाल-भारत मैत्री सेवा, एक की अनुमति चल रहीं इतनी बसें

स्वतंत्रदेश , लखनऊ:नेपाल सीमा से सिर्फ एक बस को भारत सरकार ने मैत्री बस के रूप में संचालित करने का परमिट दे रखा है। लेकिन परिवहन विभाग व पुलिस की मिलीभगत से करीब 15 से अधिक बसें यहां मैत्री बस सेवा के नाम पर चलाई जा रहीं हैं। रोडवेज की बस बिना यात्रियों के खाली फराटा भर रही है और रोज लाखों का नुकसान हो रहा है। एआरएम ने एआरटीओ को बीते सात जुलाई को पत्र लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन हुआ कुछ नहीं।नेपाल से सटा रूपईडीहा कस्बा डग्गामार वाहनों का गढ़ बनता जा रहा है। नेपाल-भारत मैत्री सेवा के नाम पर अवैध तरीके से 15 बसों का संचालन अधिकारियों के नाक के नीचे किया जा रहा है। वहीं अन्य मांर्गो पर भी गैर प्रांतों की टूरस्टि बस परमिट के नाम पर साठगांठ कर से बसों का खुलेआम संचालन रहा है। रूपईडीहा डिपो अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा घोषित किया गया था।

मौजूदा समय में डिपो से लखनऊ, कानपुर, हरिद्वार, दिल्ली, वाराणसी, सीतापुर समेत अन्य मार्गो पर निगम की बसों का संचालन किया जा रहा है। लेकिन यहीं से ठीक रूपईडीहा थाने के सामने से संचालित टैक्सी स्टैंड से दो दर्जन से अधिक गैर प्रांतों की टूरिस्ट बसें जयपुर, हरिद्वार, दिल्ली, पंजाब आदि प्रांतों के लिए जातीं हैं।इसके अलावा नेपाल-भारत मैत्री सेवा के तहत महज एक बस का संचालन नेपाल से होने पर संधि बनीं थी। इसके बावजूद बस संचालक दोनों देशों की संधि को धता बताते हुए अवैध तरीके से खुलेआम 15 बसों का संचालन नेपाल से हरिद्वार व दिल्ली के लिए कर रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री व परिवहन आयुक्त का सख्त निर्देश है कि इस तरह की बसों के संचालन पर सख्ती के साथ कार्रवाई की जाए, लेकिन खाकी की हनक के आगे जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।

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