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यूक्रेन से प्रयागराज लौटी बेटी की आपबीती

स्वतंत्रदेश,लखनऊ:प्रयागराज के 58 बच्चे यूक्रेन के अलग-अलग शहर में मेडिकल की पढाई करने के लिए वहां गए थे। इसमें संगम नगरी की 6 बेटियां भी थीं, जो अपने सपने को साकार करने वहां गई थीं। सपना यादव भी मेडिकल की छात्रा थी। मध्यमवर्गीय परिवार की सपना का कहना था कि युद्ध के बीच वहां से निकलकर इंडिया आना एक नए जीवन को पाने जैसा लग रहा है। मगर, अब भविष्य को लेकर भी चिंता सताने लगी है।

इस दौरान सपना ने बताया कि बिना खाना-पानी और ठंड की वजह से दर्जनों इंडियन छात्र-छात्राएं बेहोश भी हो गए थे। मगर, वहां पर मौजूद अन्य साथियों ने उन सबकी मदद की।

सपना ने बताया कि वह टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से MBBS द्वितीय वर्ष की छात्रा है। रूस की ओर से यूक्रेन पर शुरू हुई बमबारी के बाद हर दिन हालात बद से बदतर होते जा रहे थे। हमारे कॉलेज में भारत के 200 से ज्यादा छात्र-छात्राएं थे। हम लोगों ने किसी तरह कॉलेज से निकलने की अनुमति ली। हम लोगों ने एक बस हायर की। इसके बाद रोमानिया बार्डर के लिए निकल पड़े। मगर, रोमानिया बार्डर से करीब 20 किमी दूर ही बस ने हम लोगों को उतार दिया। अब हम सबके सामने चुनौती थी कि बार्डर पर कैसे पहुंचें।

लड़कों की अपेक्षा गिनती में लड़कियों की संख्या थी। जब हम लोग पैदल साथ-साथ चल रहे थे, तो उस दौरान तिरंगा हम लोगों को सुरक्षा का अहसास करा रहा था। आगे-आगे कोई न कोई छात्र भारत का झंडा लेकर चल रहा था। इससे वहां के लोगों व अन्य का सपोर्ट भी मिल रहा था।

शाम करीब 4 बजे रोमानिया बार्डर पर पहुंच चुके थे, पर वहां पर हालात बहुत खराब थे। हजारों की संख्या में अलग-अलग कंट्री के छात्र-छात्राएं पहले से ही मौजूद थे। उस वक्त जबर्दस्त ठंड थी। केवल जैकेट के अलावा कुछ नहीं था। ठंड के साथ पानी, खाना भी सब खत्म हो गया था। वहां पर बहुत सी छात्राओं की तबियत भी खराब हो गई थी और कई बेहोश हो गई थी।

रात दो बजे मिली रोमानिया में इंट्री

सपना ने बताया कि कभी सोचा नहीं था कि इस तरह वतन वापसी करना पड़ेगा। उसने बताया कि बस यही लगता था कि किसी तरह रोमानिया पहुंच जाए। रात करीब 2 बजे उनकी सेना ने इंडियन के लिए बार्डर खोला। हम सब बार्डर में इंट्री करने के बाद वहां पहुंचे। वहां पर कुछ अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने बस में बैठने का इशारा किया। जब बस में गए थे, तो वहां पर इंडियन छात्र-छात्राएं थीं। तब ऐसा महसूस हुआ कि अब सुरक्षित हैं।

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