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कहानी 74 साल के बुजुर्ग की

स्वतंत्रदेश,लखनऊ : टि्वटर पर एक 74 बरस के बुजुर्ग शख्स ने एक फोटो शेयर किया, इस फोटो में वो अपनी 72 साल की वाइफ की सेवा करते नजर आ रहे थे। उन्होंने अपनी वाइफ के लिए घर को हॉस्पिटल में तब्दील कर दिया। जहां ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर वेंटीलेटर तक सब कुछ मौजूद था, दिलचस्प यह है कि यह सब उसी शख्स ने किया और उसका मैनेजमेंट भी वही कर रहे हैं। यह शख्स कोई क्वालीफाइड डॉक्टर नहीं, बल्कि एक रिटायर्ड इंजीनियर हैं। नाम है ज्ञान प्रकाश, मध्य प्रदेश के जबलपुर में रहते हैं। हमने उनसे बात की तो उन्होंने इस फोटो के पीछे की पूरी कहानी शेयर की।

अपनी वाइफ कुमुदिनी श्रीवास्तव के साथ ज्ञान प्रकाश।

बार-बार हॉस्पिटल जाना पड़ता था तो घर को ही हाॅस्पिटल में तब्दील कर लिया

ज्ञान की वाइफ कुमुदिनी श्रीवास्तव की उम्र 72 साल है। ज्ञान बताते हैं कि ‘मेरी वाइफ को पिछले चार सालों से अस्थमा की बीमारी है। कई बार उन्हें हॉस्पिटल में भी एडमिट कराना पड़ता था और कुछ दिनों बाद उनको डिस्चार्ज किया जाता था। यह प्रक्रिया पिछले चार सालों से लगातार चल रही थी। पिछले साल सितंबर में जब मेरी वाइफ हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने वाली थीं तो मैंने उससे पहले ही अपने घर में हॉस्पिटल का पूरा सेटअप तैयार कराया। सबसे पहले ऑक्सीजन पाइपलाइन की फिटिंग कराई। फिर एक कमरे को आईसीयू में तब्दील किया। यहां सक्शन मशीन, नेबुलाइजर, एयर प्यूरीफायर और वेंटिलेटर भी है। कुछ दिनों बाद वाइफ को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कराकर घर ले आया।’

ज्ञान ने अपनी कार में ऑक्सीजन फिटिंग कराकर सिलेंडर लगवाए हैं, कार को पूरी तरह एंबुलेंस में तब्दील कर लिया है। उन्हें जब भी कभी इमरजेंसी में वाइफ को अस्पताल लेकर जाना होता है तो इसी से जाते हैं।

ज्ञान कहते हैं कि हॉस्पिटल में मरीज को वहां से इंफेक्शन मिलता है, लेकिन घर पर ऐसा नहीं है। हां, कभी-कभी इमरजेंसी में अस्पताल जाना पड़ता है, लेकिन अभी हॉस्पिटल से ज्यादा अच्छे तरीके से वो घर पर अपनी वाइफ की देखभाल कर पा रहे हैं। वाइफ को प्रति मिनट चार लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। हर हफ्ते 2 सिलेंडर मंगाते हैं, एक साल से सप्लाई चल रही तो सिलेंडर समय पर आ जाता है । अभी कोरोना काल में थोड़ी दिक्कत हुई थी तो कलेक्टर, एसपी को आवेदन दिया, फिर उन्होंने तत्काल सप्लायर को कॉल करके हमें ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराया।

यह सब कैसे किया? इस सवाल के जवाब पर वे कहते हैं- ‘मैं इंजीनियर हूं, और इंजीनियर वो होता है, जो हर काम कर लेता है। मैं लगातार पल्स ऑक्सी मीटर से ऑक्सीजन मॉनीटर करता हूं और उसके मुताबिक ही ऑक्सीजन सप्लाई को रेग्यूलेट करता हूं।

जब पहली बार वाइफ बीमार हुईं तो डिप्रेशन में चले गए थे

ज्ञान की वाइफ जब पहली बार साल 2016 में बीमार हुई थीं तो वो भी डिप्रेशन में चले गए थे। तब उन्होंने डिप्रेशन से बाहर आने के लिए योग का सहारा लिया थाा। जब से वाइफ के लंग्स फेलियर हुए तो वो पूरी तरह ऑक्सीजन नहीं ले पाती हैं। इस स्थिति को रेस्पेरेटरी फेलियर सीओटू नॉर्कोसिस कहते हैं। ऐसे स्थिति में मरीज को हमेशा ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना होता है। ज्ञान कहते हैं कि जवानी में तो सब मैनेज हो जाता था, लेकिन आज मेरी वाइफ को मेरी ज्यादा जरूरत है, अब मुझे प्यार से ज्यादा कर्तव्य बोध है। आज मैं जो भी हूं, उसमें उनका बराबर का योगदान है। ऐसे में मेरी भी जिम्मेदारी है कि उनकी देखभाल करूं।

 

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