मनोरंजन

पक्ष-विपक्ष से भरा सोशल मीडिया

स्वतंत्रदेश,लखनऊ:द कश्मीर फाइल्स फिल्म को लेकर इस समय पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। बहुत से लोग थिएटर में जाकर मूवी देख चुके हैं, जबकि बहुत से लोग अभी फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं। पूरे देश में इस फिल्म को लेकर दर्शकों का माहौल बहुत अलग नजर आ रहा है। ‘द कश्मीर फाइल्स’ चला रहे अधिकांश सिनेमाघरों के सारे शो हाउस फुल चल रहे हैं।

कई लेखक, संगठन और कॉमन मैन भी बढ़-चढ़कर लिख रहे, यू-ट्यूबर्स भी पीछे नहीं

देश के कई इलाको में ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म के शो की टिकट लोगों को आसानी से नहीं मिल पा रही है। मूवी को लेकर सोशल मीडिया पर कई फाइलें खुलने लगी हैं।

एक ओर पीएम मोदी की तारीफ और यूपी में इसके टैक्स फ्री होने के बाद मूवी देखने को जुटती भीड़ है। दूसरी ओर फिल्म देखने वालों से खरीदारी में छूट और टिकट खरीदने पर सुविधाएं जैसी बाजार की बातों ने माहौल को त्योहार सा उत्साही बना दिया है। हालांकि, मूवी में आधा सच दिखाने के आरोप के साथ फेसबुक पर कई लेखक, संगठन और कश्मीर विषय के जानकार भी आगे आने लगे हैं।

कश्मीर के तत्कालीन हालातों और कथानक में गिना रहे फर्क
‘कश्मीर नामा’ तथा ‘कश्मीर और कश्मीरी पंडित’ जैसी मशहूर किताबों के लेखक अशोक कुमार पांडेय अपने यू ट्यूब चैनल द क्रेडिबल हिस्ट्री पर कश्मीर के तत्कालीन हालात और मूवी के कथानक में फर्क गिनाते देखे जा रहे हैं। उनकी एक पोस्ट भी एफबी पर खूब शेयर की जा रही है।

जिम्मेदार कौन, इसको लेकर पूछे जा रहे कई सवाल
कई ऐसे पोस्टर्स भी जारी किए जा रहे हैं जिसमें तब की सरकार में शामिल राजनेताओं की तस्वीरें हैं और नीचे पलायन की त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन जैसे सवाल हैं। कुछ पोस्टर्स ऐसे भी हैं जिसमें अखबारों में छपी तब की खबरें हाईलाइट की गई हैं। फेसबुक के साथ यू ट्यूब, ट्विटर और वॉट्सऐप जैसे माध्यमों के जरिए समर्थन और विरोध के पक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं।

तस्वीर के साथ ऐसा ही एक ट्वीट विवेक अग्निहोत्री का है जिसमें वह नमाज पढ़ते दिख रहे हैं। साल 2012 के इस ट्वीट में लिखा गया है एट जामा मस्जिद और हैशटैग फ्रीडम है। इसके अलावा अनुपम खेर के दो ट्वीट्स भी शेयर किए जा रहे हैं। एक 29 जून 2010 का है जिसमें अनुपम खेर को लिखा दिखाया गया है – माय हर्ट ब्लीड्स फॉर कश्मीर।

पॉलिटिक्स एंड टेरोरिसम हस टर्न्ड हेवेन इंटू अ हेल फॉर इट्स पीपल। बोथ… हिंदू एंड मुस्लिम्स। उन्हीं का एक और ट्वीट शेयर किया जा रहा जो दस साल पहले का है और जिसके अनुसार कश्मीरी पंडित और मुसलमान औरतें समान दर्द से गुजरी।

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