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प्रणब मुखर्जी का दूसरा घर था बिहार

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नहीं रहे। बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आत्मीय संबंध रहे। जब पहली बार प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बनाए गए थे, तब ममता बनर्जी ने उन्‍हें समर्थन नहीं दिया था, किंतु नीतीश कुमार ने आगे बढ़कर प्रणब का सम्मान किया था। यहां तक कि साल 2017 में नीतीश कुमार बतौर राष्‍ट्रपति प्रणब की दूसरी पारी के लिए भी समर्थन देने के पक्ष में थे। प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति बनने के पहले से बिहार के साथ आत्‍मीय रिश्‍ता रहा। यूं कहें कि बिहार उनके लिए दूसरे घर जैसा रहा

दोबारा राष्‍ट्रपति बनाए जाने के पक्ष में थे नीतीश कुमार

बात मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार से उनके संबंधों की करें तो यह बेहद करीबी रहे। नीतीश कुमार उन्‍हें 2017 में दोबारा राष्‍ट्रपति बनाए जाने के पक्ष में थे। हालांकि, बात नहीं बन सकी। तब नीतीश कुमार महागठबंधन में राष्‍ट्रीय जनता दल के साथ सरकार चला रहे थे। कांग्रेस और वामपंथी दलों समेत कई विपक्षी दल राष्ट्रपति का संयुक्त उम्मीदवार उतारने के पक्ष में थे। उसी दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्‍ट्रपति के लिए आम-सहमति बनाने की बात कही। उन्‍होंने कहा कि इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को पहल करनी चाहिए।

प्रणब मुखर्जी के लिए दूसरे घर जैसा रहा बिहार

प्रणब मुखर्जी के लिए बिहार दूसरे घर के समान था। राष्‍ट्रपति बनने और उसके बाद भी उनका बिहार आना-जाना कम नहीं हुआ। बीजेपी नेता नीतीश मिश्र के मुताबिक बिहार उनका दूसरा घर था। पिछले करीब 50 वर्षों से प्रणब से गहरे रूप से जुड़े पूर्व विधान पार्षद एमएलसी रामचंद्र भारती के मुताबिक डॉ. जगन्नाथ मिश्र जब बिहार के मुख्यमंत्री थे तो किसी बात को लेकर आलाकमान नाराज हो गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) डॉ. मिश्र को हटाना चाहती थीं। किंतु हालात ऐसे बन गए थे कि जगन्नाथ मिश्र इस्तीफा देने के पक्ष में नहीं थे। तब प्रणब ने ही बिहार आकर जगन्नाथ मिश्र को इस्तीफा देने के लिए राजी किया था

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